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राजपूत, क्षत्रिय या ठाकुर

राजपूतो को तीन शब्दो मे प्रयोग किया जाता है

पहला '' राजपूत '' दूसरा "" क्षत्रिय '' तीसरा '' ठाकुर ,

आज इन शब्दों की भ्रान्तियो के कारण यह राजपूत समाज कभी कभी बहुत ही संकट मे पड जाता है । राजपूत कहलाने से आज की सरकार और देश के लोग यह समझ बैठते है कि यह जाति बहुत ऊची है और इसे जितना हो सके इसे नीचा दिखाना चाहिये ।

राजपूत को नीचा दिखाने के लिये लोग संविधान का सहारा ले बैठे है , और संविधान भी उन लोगो के द्वारा लिखा गया है , जिनको कभी राजपूत जाति से पाला नही पडा है , राजपूताना के किसी आदमी से अगर यह संविधान बनवाया जाता , तो शायद आज यह छीछालेदर नही होती ।

राजपूतो को खूंखार बनाने के लिये राजनीति और यह समाज जिम्मेदार है , राजपूत कभी खूंखार नही था , उसे केवल रक्षा करनी आती थी , लेकिन समाज के तानो से और समाज की गिरती व्यवस्था को देखने के बाद राजपूत खूंखार होना शुरू हुआ है । राजपूतो को अपशब्द पसंद नही है , वह कभी भी किसी पर अत्याचार होता हुआ देखना पसंद नही करता है ।।

जिसकी तलवार की खनक से अकबर का दिल घबराता था ।
वो अजर अमर शूरबीर महाराणा प्रताप कहलाता था ।।

 

"""""""""""""""""""" जय महाराणा , जय मेवाड , जय राजपूताना """"""""""""""""""

( बन्टू सिंह राजावत , जैतपुरा मढी )